कौन से कर्म श्रेष्ठ है. जिसमें कोई मिलावट नहीं, जो निस्वार्थ है, जिन कर्मों का भाव कर्म करता के आगे स्पष्ट है.कहआ भी जाता है, दुनिया तुम्हें तुम्हारे दिखावे से जानती है, परमात्मा तुम्हें तुम्हारीं से नीयत से जानता है.उससऐ कुछ नहीं छुपता.वओ जानीजाननहार नहीं है पर फिर भी सब जानता है, यह ड्रामा बड़ा ही एक्योरेट बना हुआ है, इसमें किसी के साथ अन्याय हो नहीं सकता.जओ नं लास्ट बना है, उसे ही नंबर फस्ट जाना है, इस अटल भावी को कोई टाल नहीं सकता.84 जन्मों का हिसाब है.इसनऐ ही औलाद राउंड चक्कर लगाया है, अभी अंत में आकर खड़ा हुआ है.इसऐ ही पूरा अनुभव है गुरु ओं का भी अनुभव है, राजआई का भी अनुभव है,गाँवडऐ का भी अनुभव है तो गृहस्थ का भी अनुभव है भक्ति का भी अनुभव है तो उन तीर्थ ओ का शास्त्रों का, जप, तप माला फेरना, यज्ञ रचना, दान पुण्य करना, वेद शास्त्र पढ़ना, बा्हण खिलाना, कथा करना, मुर्ति पूजा करना, भोग लगाना, देवियों का ऋंगार करना, नाच तमाशे करना, बड़ा बड़ा आवाज करना, पूछ वाला हनुमान, सूंड वाला गणेश, 8हआथओ वाली देवियाँ कोई वास्तव में होती नहीं है. कोई शंकर ने कथा नहीं सुनाई पारवती को सूक्...