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वर्तमान समय प्रमाण सेवा का स्वरूप

 


ये ऐसा है, वो वैसा है.. अरे  इसमें तुम्हारा क्या जाता, तुम्हें तो बाप को याद करना है.

बुद्धि में पुराने संस्कारो की कोई खिट पिट नहीं

कोई पद/पृतिष्ठा की दौड़ नहीं.

सभी के लिए शुभ भावना, श्रेष्ठ कामना.

मुक्ति जीवन मुक्ति की ऊंची स्थित, फरिश्ता जीवन

अभी अभी यहाँ अभी अभी वहाँ.second  में जीवनमुक्त.बुद्धि सदा बेहद में स्थित.एक मेरा बाबा, एक मेरा बेहद लक्ष्य, दैवी गुणों से श्रृंगार.सरलता और निमार्णता.

आज विश्व को क्या चाहिए, झूठे दिलासे सुन कर, बड़ी बड़ी लबार सुन कर सब थक गए है, सभी क्या चाहते अभी.. अनुभव.

सुन चुके बहुत अभी देखना चाहते है जो दिल से निकले हमारे रक्षक, हमारे सहारे दाता,हमारे इष्ट आ गए. 

दो मीठे बोल ,रूहानी दृष्टि , भासना देना, यह फास्ट गति की सेवा अभी सबको करनी है, इसमें कोई खर्चा नहीं मेहनत नहीं सिर्फ बुद्धि की पवित्रता और बाप से clear connection  चाहिए.

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