Skip to main content

श्रेष्ठ कर्म



 कौन से कर्म श्रेष्ठ है.

जिसमें कोई मिलावट नहीं, 

जो निस्वार्थ है, जिन कर्मों का भाव कर्म करता के आगे स्पष्ट है.कहआ भी जाता है, दुनिया तुम्हें तुम्हारे दिखावे से जानती है, परमात्मा तुम्हें तुम्हारीं से नीयत से जानता है.उससऐ कुछ नहीं छुपता.वओ जानीजाननहार नहीं है पर फिर भी सब जानता है, यह ड्रामा बड़ा ही एक्योरेट बना हुआ है, इसमें किसी के साथ अन्याय हो नहीं सकता.जओ नं लास्ट बना है, उसे ही नंबर फस्ट जाना है, इस अटल भावी को कोई टाल नहीं सकता.84 जन्मों का हिसाब है.इसनऐ ही औलाद राउंड चक्कर लगाया है, अभी अंत में आकर खड़ा हुआ है.इसऐ ही पूरा अनुभव है गुरु ओं का भी अनुभव है, राजआई का भी अनुभव है,गाँवडऐ का भी अनुभव है तो गृहस्थ का भी अनुभव है भक्ति का भी अनुभव है तो उन तीर्थ ओ का शास्त्रों का, जप, तप माला फेरना, यज्ञ रचना, दान पुण्य करना, वेद शास्त्र पढ़ना, बा्हण खिलाना, कथा करना, मुर्ति पूजा करना, भोग लगाना, देवियों का ऋंगार करना, नाच तमाशे करना, बड़ा बड़ा आवाज करना, पूछ वाला हनुमान, सूंड वाला गणेश, 8हआथओ वाली देवियाँ कोई वास्तव में होती नहीं है.

कोई शंकर ने कथा नहीं सुनाई पारवती को सूक्ष्म वतन में.दउनइयआ कोई और नहीं है, ऊपर नहीं है.पआर्ट तो सारा यहाँ बजता है, स्वरग,्नर्क कोई दूसरी चीज नहीं है, यही ं होता है.दऐवतआओं और असुरों की कोई युद्ध तो लगी नहीं है.यह तो अंहिसक युद्ध है.कल्यआणकआरई युद्ध है, इससे तो सवर्ग के गेट खुले थे, गाया भी जाता है कन्याओं और माताओं ने सवर्ग के द्वार खोल ए भारत माता शक्ति अवतार गाई जाती है भारत में ही.उन्हओनऐ ही बडे़ बड़े सन्यासी यों को तीर लगा या, बड़े बड़े धर्म राज को भिष्म पितामह को भी तीर लगा या.बड़ऐ, धर्म के ठेकेदआरओं को भी तीर लगायआ.यऐ कौन आएं है, यें कहां से आए हैं, 


यें तो एक दम न्यारे लोग हैं, यह इस दुनिया के लोग नहीं लगते, ये तो जैसे फरिश्ते है, ऊँ चेंज स्थान पर रहने वाले, ऊँ चे कार्य के निमित्त, बेहद में रहनें वाले, कोई हद के आकर्षण में नहीं आने वाले, हद में नहीं अटकलें वालें.हद के प्यारे नहीं, बेहद के प्यारे,किसी किसी के प्यारे नहीं सर्व के प्यारे.उपराम, स्वतंत्र, पवित्र, सदा साफ और स्वच्छ, निर्मल और शीतल.सदआ एवररेडी और संतुष्ट, शक्तिशाली और शुभ भावना से भरपूर . 


सिर्फ कहने वाले नहीं करने वाले ़.करकऐ फिर औरों से कराने वाले.कथनई करनी एक समान.


कभई कभी के प्यारे नही सदा के प्यारे और सर्व के प्यारे.मतलब परमाण प्यार ऐ नहीं, अवसर पृमाण प्यार ऐ नहीं, सदा ही प्यार ऐ, सदा ही मीठे


निरंतर सेवा धारी.कभई कभी के सेवा धारी नहीं.

मूड पृमाण सेवा धारी नहीं, सिर्फ पर्ओगाम पर्माण सेवा करने वाले नहीं, सिर्फ साधन और सेलवेशन के आधार से सेवा नहीं, बल्कि सहज और निरंतर सेवा, संकल्पों से, दृष्टि से,मधुर वाणी से, चेहरे से, ईशवरईय चलन से, अच्छे वाइब्रेशन से सेवा.


Comments

Popular posts from this blog

मनोबल की शक्ति

https://www.ajabgjab.com/2017/03/millionaires-life-changing-habits-in-hindi.html शरीर वैसे हाड़ - माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है , परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी - मोटी , टूट - फूट , हारी - बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता , शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं , परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है। निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता , न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है , परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की - जीवन आकाँक्षा की - सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है। जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों ...

सिर्फ ज्ञान पता होना काफी नही

सिर्फ ज्ञान पता होना काफी नही। उसे कब और किस विधी से,कितनी मात्रा में देना है यह भी जरूरी है जानना। ज्ञान बंधन काटने का शस्त्र है, न कि बांधने का। इससे किसी को कष्ट पहुंचाना, इसको misuse या abuse करना महापाप है।

कैसे जियें सात सितारा जीवन

सात सितारा जीवन का अर्थ है  सरल,सहज,सुखद स्वस्थ,सुंदर,सम्पन्न और समर्थ जीवन। अच्छी सोच और परमात्मा की शक्ति के इस तरह के जीवन की कल्पना भी नहीं का सकते। अच्छी सोच हमारे में पोसिटिव एनर्जी का संचार करती है और हम स्वस्थ फील करते हैं अथार्त स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर मिल कर जीवन को सुंदर बनाते हैं। प्रकृति का नियम है  जो हम उसे देते हैं वह कई गुणा  होकर हमारे पास लौट आता है जैसे अगर हमसे खुशी की तरंगें फैलेंगी तो वह हमारी खुशी को कई गुना बढ़ा सकती है तभी तो कहते है कि दान दो।अब धन दान हो या खुशियों का दान बढ़ना ही है। और जब हुम् अपने जीवन को बनाते 2 दूसरो की मदद करते हैं और उन्हें खुशी देते हैं तो हम दुआओं के पात्र बन जाते है। यह दुआएं हमारे जीवन में निखार लाती हैं और हमारे  में आत्मविश्वास का संचार करती हैं और हम फील करते हैं कि हम किसी की मदद करने में सक्षम हैं इसलिए यह जरूरी नहीं  कि किसी की मदद से पहले हमें शिखर पर पहुँचना जरूरी है किसी के मदद करना एक सीढ़ी के समान है जिससे  हम साथ साथ ऊपर चढ़ते जाते हैं और सहयोगी बनते जाते हैं साथ साथ परमात्मा की दुआओं ...