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हम कौंन सा मार्ग अपनाएं

वैसे तो हम सभी अपने को ज्ञानी समझते हैं परंतु ज्ञान क्या है यह समझने के लिए ज्ञान की विशेषताओ को समझना आवश्यक है। ज्ञान ही व्यक्ति को उदार ,सहनशील,निर्भीक,विनम्र और परोपकारी बनाता है  और उसके व्यक्तित्व में निखार आता है।गुणों का विकास होता है। दूसरी ओर अज्ञानी मनुष्य में स्वार्थ,क्रूरता,अशांति, भय और विनाश की वृद्धि होती है ज्ञान से हम अपने को और दूसरे को पहचान पाते है।सही गलत की पहचान कर साक्षी हो निर्णय ले पाते है। विवेक से काम लेते हैं ज्ञानी  ही परमात्मा के साथ का अनुभव कर पाते हैं ज्ञान मार्ग पर चलकर हम अपने जीवन को सुखद बना सकते है और साथ साथ दूसरों के जीवन को भी।परंतु अज्ञान हमें हमारी क्षमता का दुरुपयोग करने हेतु प्रेरित करता है। अज्ञान के कारण हम मोह माया में उलझते जाते है और सांसारिकता में बंधते जाते है  और विकर्म  कर बैठते और परमात्मा से दूर हो जाते है। अब हमें खुद ही निर्णय लेना है कि हम कौन?  ओम शांति।

कैसे जियें सात सितारा जीवन

सात सितारा जीवन का अर्थ है  सरल,सहज,सुखद स्वस्थ,सुंदर,सम्पन्न और समर्थ जीवन। अच्छी सोच और परमात्मा की शक्ति के इस तरह के जीवन की कल्पना भी नहीं का सकते। अच्छी सोच हमारे में पोसिटिव एनर्जी का संचार करती है और हम स्वस्थ फील करते हैं अथार्त स्वस्थ मन और स्वस्थ शरीर मिल कर जीवन को सुंदर बनाते हैं। प्रकृति का नियम है  जो हम उसे देते हैं वह कई गुणा  होकर हमारे पास लौट आता है जैसे अगर हमसे खुशी की तरंगें फैलेंगी तो वह हमारी खुशी को कई गुना बढ़ा सकती है तभी तो कहते है कि दान दो।अब धन दान हो या खुशियों का दान बढ़ना ही है। और जब हुम् अपने जीवन को बनाते 2 दूसरो की मदद करते हैं और उन्हें खुशी देते हैं तो हम दुआओं के पात्र बन जाते है। यह दुआएं हमारे जीवन में निखार लाती हैं और हमारे  में आत्मविश्वास का संचार करती हैं और हम फील करते हैं कि हम किसी की मदद करने में सक्षम हैं इसलिए यह जरूरी नहीं  कि किसी की मदद से पहले हमें शिखर पर पहुँचना जरूरी है किसी के मदद करना एक सीढ़ी के समान है जिससे  हम साथ साथ ऊपर चढ़ते जाते हैं और सहयोगी बनते जाते हैं साथ साथ परमात्मा की दुआओं ...

हमारे पूर्वज देवता या बंदर

हमारे पूर्वज देवता या बंदर आपने कभी आम के पेड़ पर नींबू को उगते देखा है   फल तो  बीज से ही निकलता है। इस सृष्टि पर अलग अलग वेराइटी है। फल फूल पशु पक्षी और मनुष्य सब प्रकृति की देन है और इसमें मनुष्य ही सर्वश्रेष्ठ  रचना है जो प्रकृति को भी बदल सकती है यानि मनुष्य और प्राकृति एक दूसरे के साथी है। सृष्टि रचना के समय दोनों ही सतोप्रधान थे। मनुष्य सतोप्रधान थे यानि सातों गुनो से  भरपूर थे जैसे पवित्रता ,ज्ञान,सुख, शांति,शक्ति,प्रेम और आनंद और इन गुणों के  कारण उनमे दैवीय गुण जैसे धैर्यता,नम्रता,सहनशीलता,शीतलता, हर्षितमुखता विधमान थे और इसलिए वह देवता कहलाये। मनुष्य की शारीरिक बनावट आज भी वही है परंतु गुणों के अभाव के कारण आज वे देवता की जगह मनुष्य  कहलाते हैं। वास्तव में मनुष्य जाति और पशु जाति दोनों बिल्कुल अलग हैं  आज मनुष्य अपना कल भूल गया है उसके गुण और शक्तियां कम होने  से उनकी जगह विकारो ने ले ली है जैसे काम क्रोध लोभ मोह अहंकार ईर्ष्या द्वेष नकल आदि ओर क्योकि बंदर में सर्वाधिक विकार होते है तो वह अपनी तुलना बंदर से कर बैठा है और अपने को ...

मुक्ति का सहज मार्ग

अदब से चलना है, दैवी फसीलत को याद रखना है। मीठा बनना है। प्यार से चलना है सबसे। छोटे बड़े की समझ रखनी है, सीखना है अपने से आगे वालो से। समय बचाना है, वैरीफाई कराना है हर बात मे हम कहा ं तक ठीक है, और क्या ऐसा परिवर्तन करे जो मार्ग सहज हो जाए और मेहनत से छूट जाए। मत लेनी है। बाप का मददगार बनना है, जिम्मेवार बनना है, श्रीमत को गंभीरता से समझना है, पीहर घर ससुर घर दोनों का कल्याण करना, अंदर बाहर एक रहना है, अनेक जन्मों के हिसाब को समझना है, एक दम साधारण बनना है, बनावट दिखावा छोड़ देना है, सीधी सच्ची बात करनी है, वाणी में महसूसता भरनी है,सभी आत्माओं का अपने जीवन में महत्व समझना है, उन्हें दिल से शुक्रिया करना है और अपनी भूलों की क्षमा याचना करनी है,,,,,,,,, जैसे कह सकते हम आपको समझ नहीं पाए, आपने बचपन से हमें ठीक राय दी, हम अपनी धुन में रहें, आज हमने घर की वैल्यू, अपनों की वैल्यू,अच्छे कर्म की वैल्यू ,अपनी विशेषता की वैल्यू को हमनें जान लिया है , हमें सब कुछ रिएलाइज कराने वाला, ऊँची समझ देने वाला एक परमात्मा बाप है,वो ही समोच्च है, उन्हें याद करने से हमारा हृदय शुद्ध होता है, ह...

भावना से कर्तव्य ऊंचा है

https://evirtualguru.com/hindi-essays/ भावना से कर्तव्य ऊंचा है Bhavna se Kartavya uncha hai  संसार में असंख्य प्राणी हैं। उनमें सर्वाधिक और विशिष्ट महत्व केवल मनुष्य नामक प्राणी को ही प्राप्त है। इसके मुख्य दो कारण स्वीकार किए जाते या किए जा सकते हैं। एक तो यह कि केवल मनुष्य के पास ही सोचने-समझने के लिए दिमाग और उसकी शक्ति विद्यमान है, अन्य प्राणियों के पास नहीं। वे सभी कार्य प्राकृतिक चेतनाओं और कारणों से करते हैं, जबकि मनुष्य कुछ भी करने से पहले सोच-विचार करता है। दूसरा प्रमुख कारण है मनुष्य के पास विचारों के साथ-साथ भावना और भावुकता का भी होना या रहना। भावना नाम की कोई वस्तु मानवेतर प्राणियों के पास नहीं हुआ करती। भावनाशून्य रहकर वे सिर्फ प्राकृतिक नियमों से प्रेम, भय आदि का प्रदर्शन किया करते हैं। स्पष्ट है कि ये ही वे कारण हैं, जो मानव को सृष्टि का सर्वश्रेष्ट प्राणी सिद्ध करते हैं। मानव जीवन में जो कुछ भी सुंदर, अच्छा और प्रेरणादायक है, वह भावनाओं के कारण या भावना का ही रूप है। मानव-जीवन में जो भिन्न प्रकार के संबंध और पारस्परिक रिश्ते-नाते हैं, उनका आधारभूत कारण...

परमात्मा के विषय में जागरूकता

परमात्मा के  विषय में भ्रान्तियाँ:- सुख दुख वही देता है। वो चाहे तो किसी को राजा बना दे, वो चाहे तो किसी को रंक बना दे। यह कहकर हम अपने कर्मों की जिम्मेवारी से छूट जाते, चाहे पहले जन्मों की, चाहे अब श्रेष्ठ कर्म के जो पुराने खाते को खत्म कर सकते हैं उसकी। हम यह भूल जाते है की भाग्य लिखने की कलम कर्म है जो हमारे हाथ में है।वर्तमान श्रेष्ठ कर्मो में इतनी शक्ति है कि वह हमारे पिछले विक्रमी को दग्ध करने की शक्ति रखते है। एक मनुष्य आत्मा अथवा अन्य प्राणीयों में यही मुख्य अंतर है कि मनुष्य आत्मा विचारशील है, उसमें रचना करने की शक्ति है। मन को सुमन बनाना और बुद्धि को ऊंच श्रेष्ठ बनाना यह मनुष्य के अपने ही हाथ में हुआ। बुद्धि की निर्णय शक्ति और परख शक्ति के द्वारा हम चयन कर सकते है  कि जीवन में आने वाली परिस्थितियों मे क्या प्रतिक्रिया करें जिससे हम से कोई नये विकर्म न बनें। हमें परमात्मा ने ज्ञान दिया, श्रेष्ठ मत दी, कर्मों की गुहा गती समझाई। कर्म अ। कदम कदम पर हमें राह दिखाई। हमें दिव्य बुद्धि दी। सद् विवेक दिया। हमारा मार्ग निष्कंटक किया। हमें प्रत्यक्ष फल की प्राप्त...

Jaisa Samay Waise Swaroop

Jaisa Samay Waisa Swaroop Deivi chalan, ek ne kaha doosre ne            maani, mutual agreement. Difference of opinion brought to one common opinion seeing the scope of vast world transformation to be brought. 1.Swayam ka sudhar, egoless. 2.work flow efficient, karya nirvighan, fast, teevra gati.productive.result oriented Sewa. 3.Family life to be created(pravriti,Mata pita, bhai, behn)United... Bonded.Preet. Ghar mein living simply. Doesn't matter, kiski mani jaye.. Karya achha hona chaiye. Treasure of positive thoughts ready.. Kya badi baat hai.. Kisi  ko zada pta hai jis subject mein wo veh kar rha, hume sahyog dena hai.. Pyar se chalna hai.. Regard dena hai.. Hume apni visheshtaon ka sahyog dena hai. Koi comparison nai... Chhota bada nai.... Tera mera nai.. Hume respect karni hai doosre ki sewa bhavna ki, time ki, upasthiti ki..kadar rakhni hai doosre ke samay, shvaas, sankalp, bol roopi khazane ki, baar baar mehnat nai leni hai... K...