अदब से चलना है, दैवी फसीलत को याद रखना है।
मीठा बनना है। प्यार से चलना है सबसे। छोटे बड़े की समझ रखनी है, सीखना है अपने से आगे वालो से। समय बचाना है, वैरीफाई कराना है हर बात मे हम कहा ं तक ठीक है, और क्या ऐसा परिवर्तन करे जो मार्ग सहज हो जाए और मेहनत से छूट जाए। मत लेनी है। बाप का मददगार बनना है, जिम्मेवार बनना है, श्रीमत को गंभीरता से समझना है, पीहर घर ससुर घर दोनों का कल्याण करना, अंदर बाहर एक रहना है, अनेक जन्मों के हिसाब को समझना है, एक दम साधारण बनना है, बनावट दिखावा छोड़ देना है, सीधी सच्ची बात करनी है, वाणी में महसूसता भरनी है,सभी आत्माओं का अपने जीवन में महत्व समझना है, उन्हें दिल से शुक्रिया करना है और अपनी भूलों की क्षमा याचना करनी है,,,,,,,,, जैसे कह सकते हम आपको समझ नहीं पाए, आपने बचपन से हमें ठीक राय दी, हम अपनी धुन में रहें, आज हमने घर की वैल्यू, अपनों की वैल्यू,अच्छे कर्म की वैल्यू ,अपनी विशेषता की वैल्यू को हमनें जान लिया है , हमें सब कुछ रिएलाइज कराने वाला, ऊँची समझ देने वाला एक परमात्मा बाप है,वो ही समोच्च है, उन्हें याद करने से हमारा हृदय शुद्ध होता है, हमारी समझ बड़ती, हम पावन बनते हैं। वो ही हमारा सच्चा मात पिता बंधु सखा है, मुझ आत्मा के सर्व सम्बन्ध उस एक से ही है, वो ही मेरे जन्म जन्म का साथी है, उसे ही मैने जन्म जन्म पूजा है, चाहा है, पुकारा है, अब वे आ गए है, मेरे जन्म जन्म की आश पूरी करनें, मुझे सन्मार्ग दिखाने, मुझे ऊंचा उठाने, मुझे महान बनाने।
इस तरह परमात्मा की ही महीमा सुनानी है और अपने जीवन का सच्चा समाचार ही सुनाना है, सत्यता का ही वर्णन करते झूठ पाप से स्वयं को मुक्त करना है।
अब सारा ही समय योगयुक्त रहना है, निरंतर योगी बनना, नैचुरल योगी बनना, हर कर्म में धर्म शामिल करना है।
त्याग द्वारा भाग्य बनाना है।

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