साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाली जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां है। सभी धर्मगुरुओं ने भी ऊपर इशारा किया, सबका मालिक एक, एक ओंकार आदि। गीता में यह साफ लिखा है कि जब- जब धर्म की ग्लानि होती है, तब तब मैं आता हूं। यदि वह सर्वव्यापी है तो उसे आने की जरूरत ही क्या है। वह तो हर जगह है। परंतु यह जानने की आवश्यकता है कि हमने उसे सर्वव्यापी क्यों कहा, क्योंकि परमात्मा में असीम शक्तियां है। वह सर्वशक्तिमान है। वह चांद सितारों से भी पार परमधाम में रहता है। वह हम सबका पिता है। परना अदृश्य उसे हमसे बहुत प्यार है। जैसे ही हम साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाली जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां ह...