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क्या परमात्मा सर्वव्यापी(कण कण में व्याप्त ) है ?


साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाली जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां है। सभी धर्मगुरुओं ने भी ऊपर इशारा किया, सबका मालिक एक, एक ओंकार आदि।
         गीता में यह साफ लिखा है कि जब- जब धर्म की ग्लानि होती है, तब तब मैं आता हूं। यदि वह सर्वव्यापी है तो उसे आने की जरूरत ही क्या है। वह तो हर जगह है। परंतु यह जानने की आवश्यकता है कि हमने उसे सर्वव्यापी क्यों कहा, क्योंकि परमात्मा में असीम शक्तियां है। वह सर्वशक्तिमान है। वह चांद सितारों से भी पार परमधाम में रहता है। वह हम सबका पिता है। परना अदृश्य उसे हमसे बहुत प्यार है। जैसे ही हम साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाली जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां है। सभी धर्मगुरुओं ने भी ऊपर इशारा किया, सबका मालिक एक, एक ओंकार आदि।
         गीता में यह साफ लिखा है कि जब- जब धर्म की ग्लानि होती है, तब तब मैं आता हूं। यदि वह सर्वव्यापी है तो उसे आने की जरूरत ही क्या है। वह तो हर जगह है। परंतु यह जानने की आवश्यकता है कि हमने उसे सर्वव्यापी क्यों कहा, क्योंकि परमात्मा में असीम शक्तियां है। वह सर्वशक्तिमान है। वह चांद सितारों से भी पार परमधाम में रहता है। वह हम सबका पिता है। परना अदृश्य उसे हमसे बहुत प्यार है। जैसे ही हम साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाली जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां है। सभी धर्मगुरुओं ने भी ऊपर इशारा किया, सबका मालिक एक, एक ओंकार आदि।
         गीता में यह साफ लिखा है कि जब- जब धर्म की ग्लानि होती है, तब तब मैं आता हूं। यदि वह सर्वव्यापी है तो उसे आने की जरूरत ही क्या है। वह तो हर जगह है। परंतु यह जानने की आवश्यकता है कि हमने उसे सर्वव्यापी क्यों कहा, क्योंकि परमात्मा में असीम शक्तियां है। वह सर्वशक्तिमान है। वह चांद सितारों से भी पार परमधाम में रहता है। वह हम सबका पिता है। परना अदृश्य उसे हमसे बहुत प्यार है। जैसे ही हम साधारण भाषा में हम यह कहते ही रहते हैं कि ऊपर वाला जाने , जो ऊपर वाले को मंजूर, ऊपर वाले का जो हुकुम होगा, ऊपर वाला जब चाहेगा आदि आदि इस बात से यह स्पष्ट होता है कि परमात्मा कहीं ऊपर है परंतु हम सिर्फ यह कहते हैं पर जानने की कोशिश नहीं करते कि वह कहां है। सभी धर्मगुरुओं ने भी ऊपर इशारा किया, सबका मालिक एक, एक ओंकार आदि।
         गीता में यह साफ लिखा है कि जब- जब धर्म की ग्लानि होती है, तब तब मैं आता हूं। यदि वह सर्वव्यापी है तो उसे आने की जरूरत ही क्या है। वह तो हर जगह है। परंतु यह जानने की आवश्यकता है कि हमने उसे सर्वव्यापी क्यों कहा, क्योंकि परमात्मा में असीम शक्तियां है। वह सर्वशक्तिमान है। वह चांद सितारों से भी पार परमधाम में रहता है। वह हम सबका पिता है। परना अदृश्य उसे हमसे बहुत प्यार है। जैसे ही हम उसे प्यार से याद करते है। हमें उसकी उपस्थिति फील होने लगती है। फिर चाहे हम उसे घर बैठ कर याद करें मंदिर, गुरुद्वारा, या चर्च में या फिर जंगल में वह वहां उपस्थित हो जाता है। इसलिए यह बात प्रसिद्ध हो गई कि वह सब जगह है। और वह इतना दयालु है। कि वह धरती पर हर प्राणी, जानवर, प्रकृति का संचालक है। इसलिए भी यह कहा जाने लगा कि कण कण में भगवान है। वास्तव में उसकी शक्तियां इतनी है। कि जो व्यक्ति उससे सर्व संबंध जोड़ लेता है। और उसकी मन बुद्धि परमात्मा से जुड़ जाती है। उसे चारों और उसकी भासना होने लगती है। और उसको हर तरफ दिव्य नेत्रों से परमात्मा ही दिखाई देने लगता है। इसलिए उसे सर्वव्यापी की संज्ञा दी गई।
बीके  दया बहन
                   ओम शान्ति

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