सिर्फ ज्ञान पता होना काफी नही। उसे कब और किस विधी से,कितनी मात्रा में देना है यह भी जरूरी है जानना। ज्ञान बंधन काटने का शस्त्र है, न कि बांधने का। इससे किसी को कष्ट पहुंचाना, इसको misuse या abuse करना महापाप है।
https://www.ajabgjab.com/2017/03/millionaires-life-changing-habits-in-hindi.html शरीर वैसे हाड़ - माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है , परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी - मोटी , टूट - फूट , हारी - बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता , शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं , परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है। निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता , न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है , परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की - जीवन आकाँक्षा की - सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है। जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों ...
दोस्त ऐसा हो जो सहारा दे, साथ दे, दिल की बात सुने ! दिल को सुकून दे, हमारी ख़ुशी में खुश हो! हमारा सच्चा शुभ चिन्तक हो! हमें राह दिखाएं! हमारा मार्ग प्रशस्त करें! हमें सम्मान दे, हमें ऊँची दृष्टि से देखें! हमारे विश्वास को बढाएं! दोस्त वो जो सदा बाहें पसारे स्वागत करें, ऊँचा उठाएं!
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