https://www.ajabgjab.com/2017/03/millionaires-life-changing-habits-in-hindi.html शरीर वैसे हाड़ - माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है , परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी - मोटी , टूट - फूट , हारी - बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता , शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं , परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है। निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता , न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है , परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की - जीवन आकाँक्षा की - सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है। जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों ...

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