Skip to main content

हे आत्मा अब फरिश्ता बन


बहुत प्यासे हैं, (स्नेह के, एक झलक के, दर्शन के) भटक रहे हैं! आपको ढूंढ रहे हैं! पुकार रहे हैं! दो शब्द सुनने के चात्रक हैं! आप धरती के सितारे हो! सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले हो! क्या इतना महत्त्व समझते हो अपना या अभी तक पुरुषार्थी हो! क्या अंत तक पुरुषार्थी ही रहना हैं ! क्या सम्पूर्ण त्यागी, सर्व वंश (यानी अंत में बनना हैं, आज दृष्टि ठीक की, कल वृत्ति ठीक की, परसों बोल ठीक किया ----- ! सम्पूर्ण त्याग से सम्पूर्ण स्मृति स्वरुप से सम्पूर्ण नष्टोमोहा और बाप के सम्पूर्ण अधिकार पाना, क्या इस राज को ठीक रीति समझा हैं! या मेहनत ही करते रहेंगे अंत तक ! संगम युग पुरुषार्थ का समय और सतयुग प्रालब्ध का ऐसे तो नहीं समझते! आप ही हो न नयी दुनिया की झलक दिखाने वालें! दुनिया आप फरिश्तो  को ढूंढ रहीं हैं, कब आयेंगे हमारे रक्षक, हमारे सहायक ।

Comments

Popular posts from this blog

सिर्फ ज्ञान पता होना काफी नही

सिर्फ ज्ञान पता होना काफी नही। उसे कब और किस विधी से,कितनी मात्रा में देना है यह भी जरूरी है जानना। ज्ञान बंधन काटने का शस्त्र है, न कि बांधने का। इससे किसी को कष्ट पहुंचाना, इसको misuse या abuse करना महापाप है।

मनोबल की शक्ति

https://www.ajabgjab.com/2017/03/millionaires-life-changing-habits-in-hindi.html शरीर वैसे हाड़ - माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है , परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी - मोटी , टूट - फूट , हारी - बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता , शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं , परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है। निश्चित ही मृत्यु की विभीषिका और अनिवार्यता से इन्कार नहीं किया जा सकता , न ही विपत्ति का संकट हल्का करके आँका जा सकता है , परन्तु इतना होते हुए भी जिजीविषा की - जीवन आकाँक्षा की - सामर्थ्य सबसे बडी है और उसके सहारे संकटों को पार किया जा सता है। जीवन के लिए संकट प्रस्तुत करने वाले क्षण बहुत लोगों ...

दोस्त कैसा हो

दोस्त ऐसा हो जो  सहारा दे, साथ दे, दिल की बात सुने ! दिल को सुकून दे, हमारी ख़ुशी में खुश हो! हमारा सच्चा शुभ चिन्तक हो! हमें राह दिखाएं! हमारा मार्ग प्रशस्त करें! हमें सम्मान दे, हमें ऊँची दृष्टि से देखें! हमारे विश्वास को बढाएं! दोस्त वो जो  सदा बाहें पसारे स्वागत करें, ऊँचा उठाएं!