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ज्ञान का सार


ज्ञान का सार
1.    दान देने से बढ़ता है।
2.   सभी को क्षमा करना,
दूसरों  पर दया करना –यह है स्वयं को सुखी रखने का सबसे आसान उपाय।
3.    जीवन में अनुभवों से जो सीखता वह आगे बढ़ता।
4.    पुण्य कर्म/श्रेष्ठ कर्म/निस्वार्थ कर्म ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
5.    जीतना है तो दिलों को जीतो, छोड़ना है तो अंहकार को छोड़ों।
6.    बदलना है तो खुद को बदलो।
7.    सफलता मिल जाए तो बहुत खुश मत हो जाना, असफलता मिले तो निराश मत होना, यह जीवन हार-जीत, सफलता-असफलता, सुख-दु:ख का खेल है।
8.    आगे बढ़ने के लिए कभी झूठ, ठगी
किसी का सुख छीनना, किसी का सुख लूटना, किसी के आत्मसम्मान को रौंदना यह रास्ता सही नही है।
9.    ऊंचा उठने के लिए कभी किसी को नीचा नही दिखाना।
10. अपने गुणों की, अपने महान कार्यों की, महीमा की आशा नहीं रखना, वर्णन करने में महानता नहीं। मुख में अग्नि का वास होता है।
11. जो आपके पास है वह एक अच्छा जीवन सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए बहुत है।
12. अपने आप से तुलना मनुष्य को आगे बढ़ाती।
13. सर्व को सम्मानपूर्वक दृष्ट‍ि से देखना, मानव मात्र को सम्मान करना, सर्व के माननीय बनना है।

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